
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ : राजनांदगांव का स्व. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, पेंड्री, छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह अस्पताल निजी अस्पतालों की मनमानी लूट से लोगों को राहत दे रहा है, और इसमें लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। राजनांदगांव के विधायक और छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह इस संस्थान की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, जिससे मरीजों को काफी राहत मिली है।
डॉ. प्रकाश खुटे: मानवता के प्रतीक जो मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं
इस बड़े संस्थान में कुछ डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही की खबरें आती रहती हैं, लेकिन डॉ. प्रकाश खुटे जैसे कुछ डॉक्टर मानवता और समर्पण का प्रतीक बने हुए हैं। ड्यूटी के दौरान मरीजों का पूरा ध्यान रखने वाले डॉ. खुटे का सरल और मधुर व्यवहार मरीजों और उनके परिजनों को काफी प्रभावित करता है। शहर के मरीज भी उन पर खासा विश्वास करते हैं, जो उनकी कार्यनिष्ठा और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
नेताओं की नुमाइश पर लाखों का खर्च, अस्पतालों की अनदेखी
विडंबना यह है कि जब शहर में किसी मंत्री या नेता का आगमन होता है, या फिर कोई सांस्कृतिक आयोजन होता है—चाहे राज्योत्सव हो या विवाह समारोह—डीजे, लाइट्स और सजावट पर लाखों रुपये बेझिझक खर्च कर दिए जाते हैं। लेकिन जब बात अस्पताल में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं जैसे सीटी स्कैन, एमआरआई, या अस्पताल के मेनगेट पर स्वागत द्वार और रास्ते में संकेत बोर्ड उपलब्ध कराने की आती है, तो नेता और अधिकारी सरकारी फंड के ‘अभाव’ का रोना रोने लगते हैं। यह दोहरी नीति आम जनता में भारी आक्रोश पैदा करती है।
कमिशन-प्रिय’ सौंदर्यीकरण बनाम मरीजों की जान
नेताओं और अधिकारियों का ध्यान मरीजों के जीवन से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं पर कम, और प्रतीक्षालय, बाउंड्रीवाल और स्मारकों के सौंदर्यीकरण पर ज़्यादा रहता है। इसके पीछे ‘कमिशन’ का खेल साफ झलकता है। मरीजों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं या तो जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराई जातीं, या फिर निजी अस्पतालों की जेब भरने के लिए उन्हें रोक दिया जाता है। यह सिलसिला कहीं न कहीं गरीब मरीजों को आर्थिक शोषण की ओर धकेलता है, जिससे उन्हें महंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर मजबूर होना पड़ता है।
नेशनल हाईवे से अस्पताल पहुँचने के रास्ते पर द्वार और बोर्ड का अभाव: शर्मनाक लापरवाही
यह अत्यंत शर्मनाक है कि राजनांदगांव जैसे सभ्रांत जिले में स्थित अटल मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुँचने के लिए मरीजों और उनके परिजनों को भटकना पड़ता है। अस्पताल के मेनगेट पर या नेशनल हाईवे से अस्पताल पहुँचने वाले मार्ग पर एक भी दिशा-सूचक बोर्ड नहीं है। रोज सैकड़ों मरीज इस कमी के कारण भटकने को मजबूर होते हैं। आमजनों का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है ताकि मरीज सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित रहें और निजी अस्पतालों में जाने पर मजबूर हों।
यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शासन और जनप्रतिनिधियों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। ज़रूरत है एक ईमानदार समीक्षा और कड़े प्रशासनिक निर्णयों की, वरना विकास की ये ‘इबारतें’ सिर्फ़ पोस्टरों में ही चमकेंगी, अस्पतालों में नहीं।
क्या आपको लगता है कि स्थानीय नेताओं और अधिकारियों को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, या यह समस्या लंबे समय तक बनी रहेगी?


